साहित्य

हे -महाबली वीर हनुमान

शशि कांत श्रीवास्तव

चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को
दिवस था मंगलवार….,
पिता केसरी -माँ अंजना के घर,
जन्म हुआ -पवन पुत्र वीर हनुमान का,
बचपन में था नाम ये उनका,
शंकर सुवन -केसरीनंदन और था,
अंजना सुत -मारुती नंदन,
एक दिन जब वो बालपन में,
सूर्य को खाया फल रसीला जान कर,
जब इंद्र ने किया वार मारुती के हनु पर,
तब देवों ने दिया नाम हनुमान का,
और कहलाये मारुती नंदन,राम भक्त हनुमान,
राम के नाम को बना के आधार,
बड़ा किया राम के नाम को राम से बड़ा,
जिनके मन में बसते हैं श्री राम,
तन में बसते हैं श्री राम,
हे -महाबली वीर हनुमान,
हे -कलयुग के भगवान,
हे -अष्ट सिद्धि नव निधि दाता,
हे संकट को हरने वाले,
संकटमोचक कहलाते हो,
हाथ जोड़ कर विनती करते हम,
मेरे भी संकट को हर लो,
हे -महाबली वीर हनुमान,
हे -महाबली वीर हनुमान ||

शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब
स्वरचित मौलिक रचना

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