
पवन पुत्र कहलाते हैं
राम नाम गुण गाते हैं
गंगा तट पर तुलसी को
हनुमान लला चेताते हैं।
राम प्रभु पहचानो प्यारे
चंदन तिलक लगाते हैं
तुलसी चेते दर्शन पाये
पार जगत हो जाते हैं।
अपने स्वामी के खातिर
छलॉंग वह सागर जाते हैं
त्रिकालदर्शी रावण के
दस शीश झुका वह आते हैं।
जो भी महिमा उनकी गाते
भूत निकट न उनके आते
हर संकट को दूर करें वह
संकट मोचन कहलाते हैं।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर, राजस्थान




