
हिंदी को तारीख में न बाँधें,
ये मनोवेगों का सुखद संचार है
जिसे कवि काव्य की आत्मा समझ,
अपनी खुशी या वेदना समझाते हैं।
हिंदी कहने सुनने में सुविधा है
पढ़ने लिखने में न कोई दुविधा है
जो सहज, सरल और सुधामय है
हिंदी भारतीय भाषाओं की विधा है।
राज भाषा की ये रानी है,
प्यार चिनाब,झेलम पंजाबी से है।
कश्मीर से कन्याकुमारी में है
हर प्रदेश की जानी पहचानी है।
हिंदी सम्पूर्ण हिन्दुस्तानी है
जिसकी जननी देववाणी है
ये देश की सीमा से नहीं बंधी है
विदेशों में भी जानी पहचानी है।
हिंदी साहित्य की गरिमा है,
जो प्रत्येक शैली में व्यापी है
जो भारत के मन मंदिर में है।
इसके सानिध्य ही बंगाल और सिंध है
हिंदी में भारतीय साहित्यकार
सब प्रदेशों का करते हैं उद्बोधन,
भारत भाषाओं का खिलता बाग है;
हिंदी उस बाग का महकतागुलाब है।
कविता ए झा
नवी मुंबई




