
ना समझो बोझ बेटियो को घर की रौनक कहलाती है
मीठी मीठी बातों से अपनी सबका दिल बहलाती है
चुड़ियों की खनखन से आंगन में महका करती हैं
खुशकिस्मत वालो के घर की लक्ष्मी बनकर आती है।
ये बेटियां ही नवजीवन दे नये युग का आरंभ करती है
खिलौनों के बर्तन में पानी भर कर जब देती है
चाय पिलो पापा जब तोतली जुबां में कहती हैं
मन खुश हो जाता देख नन्ही सी मुस्कान इसकी
नजर ना लगे इसे बुरी फिर मां बलाएं लेती है
ये बेटियां ही नवजीवन दे नये युग का आरंभ करती है
नन्हें नन्हें पैरों में जब घुंघरू की खनक बजती है
हर काम से अपने सबका दिल खुश करती है
देख दर्द में मां बाप को हमेशा मदद करती है
नहीं रखती ख्वाहिश ज्यादा बस सबका ख्याल रखती है
ये बेटियां ही नवजीवन दे नये युग का आरंभ करती है
नहीं कहती दिल की बातें किसी से छुपा कर रखती है
अपनी चाहतों से पहले बस अपनों के लिए जीती है
दो उड़ान इसके पंखों को मर्जी से अपनी उड़ना चाहती है
हौसला में इसके गजब की शक्ति सब कुछ कर जाती है
ये बेटियां ही नवजीवन दे नये युग का आरंभ करती है
कर ले इरादा पक्का तो नये इतिहास बनाती है
बहन , मां ,बेटी ,अफसर हर रूप में उतर जाती है
ना रोको मत बांधो रस्मों की जंजीरों में इसे
कुछ कर दिखाने का जज्बा ये बेटियां भी रखती है
ये बेटियां ही नवजीवन दे नये युग का आरंभ करती है
ना डालो ये वहसी नजरें इन पर ये भी एक इंसान हैं
सब्र का बांध छलक जाए जब दुर्गा काली बन जाती है
सपनो को दिखा दो राह उसके नाम जहां में रोशन करती है
बेटों से बढ़कर हर रिश्ते को ईमानदारी से निभाया करती है
ये बेटियां ही नवजीवन दे नये युग का आरंभ करती है
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻
सहारनपुर उत्तर प्रदेश



