शोध कार्य के लिए अथाह लेखन, डॉ रामशंकर चंचल ने दिया,झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल को अद्भुत गौरव

आज देश के मध्य प्रदेश में आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ को साहित्य जगत में चर्चित कर अमर कर देने वाले डॉ रामशंकर चंचल ने झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल के लिए सारे देश और विश्व को अथाह लेखन से बहुत बहुत उम्दा सटीक जानकारी लिए कविता, कथा, आलेखऔर उपन्यास, खंड काव्य आदि आदि के साथ पर्याप्त सृजन उपलब्धि लिए देश और दुनिया को चौका दिया भेंट कर
यह सचमुच अद्भुत ईश्वरीय उपहार है झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल में साहित्य जैसे विषय पर चर्चा करना बेइमानी लगती हैं कोई नहीं यहाँ जो साहित्य पर दस्तक दे चर्चा करे बात करें ऐसी जगह पर आजीवन व्यतीत कर रहे डॉ रामशंकर चंचल ने झाबुआ को उसकी महिमा को उसकी सहजता सरलता और मानवीय सोच और चिंतन को यहां रह रहे ईश्वर तुल्य आदिवासी जन भोले भाले इंसान को आज सम्पूर्ण विश्व को परिचय कराया है कि झाबुआ क्या है
इतना पर्याप्त सृजन है जो साहित्य की अनेक विधाओं में लिखा गया परम् सत्य है सारी जिंदगी आदिवासी पिछड़े अंचल में रहते हुए शिक्षक पद पर विराजमान डॉ रामशंकर चंचल ने बहुत ही करीब से देखा है आदिवासी पिछड़े अंचल को बल्कि उनके साथ देते हुएं जीया है यही वजह है कि उन्हीं की तरह सहज सरल छवि और भाषा शैली के साथ बात करते हुए सभी मानव मात्र पशु पक्षी का आदर करते हुए जी रहे डॉ रामशंकर चंचल सचमुच एक बेहद सहज सादगी लिए इंसान का नाम हैं जो केवल प्यार करना जानता है सभी मानव मात्र पशु पक्षी सभी से राग द्वेष जलन और ईर्ष्या ऊंच नीच अमीर गरीब जाति धर्म राजनीति आदि आदि सैकड़ों विषयों से कोसों दूर रह रहे डॉ रामशंकर चंचल ने शोध कार्य के लिए पी एच डी करने वाले को सहज सरल उपलब्ध होगा वह भी कहीं भटकने की जरूरत नही केवल इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों पर दस्तक दे
सचमुच अद्भुत सुखद अहसास होगा कि झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ पर पूर्ण संभावना है कि भविष्य में बहुत बहुत कुछ पर्याप्त कार्य होगा जो झाबुआ के इतिहास में पहली बार होगा साथ ही अनेक सकारात्मक कार्य होगे ही जो झाबुआ के लिए हितकारी होगी आदिवासी जन जीवन में बदलावा होगा प्रगति और उन्नति होगी सब कुछ तय है होना होगा यह सुखद अहसास होगा




