साहित्य

देश प्रेम

डॉ.पुष्पा सिंह

हिंद देश के निवासी
जीते हैं हम शान से
वीरों ने दी आजादी
शहीद हुए बलिदान में।

उत्तर में खड़ा हिमालय
प्रहरी है पर्वत विराट
पैर पखारता दक्षिण में
सागर का है सम्राट।

गोद में पावन धरा के
बहती हजारों नदियाँ
जीते हैं हम इन्हीं से
जुड़ी अनेकों कड़ियाँ।

हरी भरी धरती अपनी
नीले आसमान तले
लहर लहर फहराए तिरंगा
शांति त्याग विश्वास लिए।

चलो केसरिया सा त्याग करें
सड़क निवासी को दान करें
श्वेत शुद्ध सा भरें अनुराग
गरीबों को हम प्यार करें।

हरी भरे हों वन उपवन
भला हो हर किसान का
चौबीस घंटे रहें चौकन्ने
गति अपनाएँ चक्र सा।

वीरों की कुर्बानी का
हम रखें हिय में लाज
सैनिक खड़े सीमा पर
देश करे नित नाज।

आज़ादी पाए कठिनाई से
इसका हम सम्मान करें
तमस मिटा लें ज्ञान बुद्धि से
दीनों का सहारा बनें।

भारत माँ को करें सलाम
जय जवान जय किसान
इंसा कुदरत के वरदान
हर दिन गाएँ गौरवगान।
डॉ.पुष्पा सिंह

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