मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
तेरे जिगर का टुकड़ा हूँ,
क्यों प्राण हरे माँ मेरा।।
लगी थिरकने जब मैं अन्दर।
बाहर लगा ये कैसा मंजर।
अश्कों का आँखों में समन्दर,
हाल बुरा है तेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
गर मैं कभी तेरे घर आऊँ।
खुशियों से आँगन महकाऊँ।
बेटी नहीं बेटा बन जाऊँ,
साथ ना छोडूं तेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
जिद ना कभी मैं ऐसी करती।
देख निगाहें तेरी डरती।
पर तुझपे दिल जान से मरती,
खेलती खेल घणेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
आँख में आँसू देख ना पाऊँ।
हँस-हँस के तेरा दिल बहलाऊँ।
पर अपने अश्क रोक ना पाऊँ,
फिर टूट जाये दिल मेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
यूँ इतना मैं पढ लिख जाऊँ।
दूध ना तेरा कभी लजाऊँ।
नाम तेरा रोशन कर जाऊँ,
इक यही प्रण हो मेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
शायद मेरी बात समझ ना पायी।
और कौनसी दूँ मैं सफाई।
बरसों से प्राण मेरे हरती आयी।
बता कसूर क्या मेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
मुझको भी माँ दीदार करा
कैसा संसार है तेरा।
तेरे जिगर का टुकड़ा हूँ,
क्यों प्राण हरे माँ मेरा।।
✍️ सुन्दर लाल मेहरानियाँ_राजस्थानी



