साहित्य

चांद का दीदार

सौ, भावना मोहन विधानी

करवा चौथ और ईद के त्योहार पर,
चांद का दीदार शुभ माना जाता है।
चांद की होती है यहां मन से पूजा,
यह त्यौहार की पहचान माना जाता है।

अंबर पर चांद जब चमकता है,
लोग खुशियों से झूम उठते हैं।
शीतल किरनें धरा पर फैलता है,
सजदे में हजारों हाथ उठाते हैं।

चांद से ही जीवन में क्यों खुशियां आए?
बिना चांद ही हम गले मिल लेते हैं।
भूल कर हम जाति का भेदभाव,
मुस्कुरा कर अपनी ईद मना लेते हैं।

जिस दिन इंसान प्यार को अपनाएगा,
वसुंधरा खुशी से झूम उठेगी।
इंसान इंसान को देख मुस्कुराएगा,
जिंदगी जन्नत सी महक उठेगी।

सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र

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