
जो चराग़ तूने जला लिया उसे क्यों बुझा दिया
अपना बना के दिल से क्यूँ तुमने हमें गिरा दिया।
ये उदासियाँ ये तीरगी कई ग़म मिले तुझे क्या पता
मिरी आरज़ू का तूने क्या खूब ये सिला दिया।
मुझे याद है ये तिश्नगी मेरे साथ ही तुझे भी
बड़ी मुद्दों पे पता चला कि तूने मुझे भुला दिया।
रात का हुस्न है खिला खिला ये तुम ज़रा देख लो
तेरी चाहत ने मुझे ये रास्ता मिला दिया।
ये रात की ख़ुशबू या महक तेरे बदन कि है
हैरान हूँ तिरी सूरत में मुझे क्या दिखा दिया।
मंजुला शरण “मनु”
राँची,झारखण्ड़।




