नन्ही, प्यारी – प्यारी चिड़िया,
उड़ती फिरती प्यारी चिड़िया।
गौरैय्या है सबकी प्यारी,
घर – आंगन में बैठे चिड़िया।
अब मुश्किल से दिखती चिड़िया,
खिड़की पर ना आती चिड़िया।
दाना पानी रखना भूलें,
अब नजदीक न आती चिड़िया।
सूरत उसकी भोली – भाली,
भाए उसे पेड़ों की डाली।
पहले से कम उनकी संख्या,
दूर गई चिड़िया मतवाली।
आज दिवस गौरय्या का है,
दिन प्यारा गौरय्या का है।
खोज खबर उसकी है रखना,
हर दिन अब गौरय्या का है।
*नागेन्द्र नाथ गुप्ता, ठाणे (मुंबई)*




