
मै मंदिर जाता हूँ
इससे भक्ति मिलती
तुम्हारे लिए।
मुक्त मणि अर्पित हूं
इससे सुख पाता
तुम्हारे लिए।
प्रभू की प्रतीक्षा करता
इससे सौभाग्य मिला
तुम्हारे लिए।
भक्तों की सेवा करता
इससे मोक्ष पाता
तुम्हारे लिए।
रात दिन स्मरण करता
इससे भक्ति बढ़ती
तुम्हारे लिए।
जीवन महान बनता है
इससे चरित्र निर्मल
तुम्हारे लिए।
श्रीनिवास यन,साहित्यकार
आंध्रप्रदेश




