
वन्दे वांछित मनोरथार्थ
चंद्रार्धकृत शेखराम।
कमलस्थितां चतुर्भुजां
सिद्धदात्री यसश्विनीम्।
माँ दुर्गा का नौवाँ स्वरूप
माता सिद्धिदात्री जी का है,
जो भक्त जनों के सर्व कार्य
सम्पन्न और सिद्ध करती हैं।
सिद्धिदात्री दुर्गा माँ के नौ रूपों
में नौवीं और अंतिम नवदुर्गा हैं,
जिसका अर्थ है अलौकिक शक्ति,
ध्यान क्षमता और देने वाली हैं।
नवरात्रि के नौवें दिन नवदुर्गा की
नौ रातें उनकी पूजा की जाती है,
माता सिद्धिधात्री ही सभी दिव्य
आकांक्षाओं को पूरा करती हैं।
ऐसा माना जाता है कि भगवान
शिव के शरीर का एक पक्ष देवी
सिद्धिदात्री का है, इसलिए उन्हें
अर्धनारीश्वर नाम से जाना जाता है।
आदित्य वैदिक शास्त्रों के अनुसार,
भगवान शिव ने इस देवी की पूजा
करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थी,
माँ सिद्धिदात्री देवी को नमस्कार है।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ




