
कहो आज कोई नई सी कहानी।
उमंगो भरी सत्य गाथा पुरानी।।
न राजा न रानी न हो राजधानी।
जवानी दिवानी अनोखी रवानी।।
जहाँ भाव में हो सदा सत्यता ही।
नवाचार हो सभ्यता नव्यता ही।।
सिखाती हमें दिव्य आभा सुहानी।
सदा मार्गदर्शी सुभाषा बखानी।।
महाभव्य शोभे अजंता अयानी।
सभी सद्गुणों से भरी देवयानी।।
उजाला करो दूर भागे अँधेरा।
सदा सूर्य लाता सुहाना सवेरा।।
सिखाती हमें जीविका पाठशाला।
यही जिंदगी की सधी रंगशाला।।
जला दीप की शृंखला दीपमाला।
सजाओ सभी छंद की कार्यशाला।।
-डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




