
नमन उस युगपुरुष को जो
महामना बनकर अमर हुआ
मदन मोहन मालवीय- नाम
अमिट एक हस्ताक्षर हुआ !
भारत माँ के तेजस्वी सपूत
विद्या जिनकी साधना थी
वाणी में थी वेदों की गूंज
और कर्म में राष्ट्र आराधना थी !
न राजनीति का लोभ था
न सत्ता का कोई अभिमान
सेवा, समन्वय, सौहार्द में
व्यक्तित्व की थी पहचान !
प्रयाग की पावन धरा से उठकर
काशी को ज्ञान का केंद्र किया
शिक्षा केवल पठन पाठन नहीं
चरित्र संस्कार का महत्व बताया !
आज भी देश शीश झुकाता है
उस महा मानव के चरणों में
जिन्होंने सत्यमेव जयते जैसा
आदर्श वाक्य दिया भारत को !
– मनीषी सिन्हा
– गाजियाबाद, उ ॰ प्र ॰




