साहित्य

अटल बिहारी

धीरेन्द्र कुमार जोशी

भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी की जयंती पर सादर नमन के साथ मेरी कविता..

सप्त सुरों में हम गाएं यशगान सदा।
अटल-अमर -अक्षय होवे सम्मान सदा।

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होनहार थे बचपन से ही अटल बिहारी।
रखते थे अद्भुत अनुपम प्रतिभाएं सारी।
छुटपन से ही नित नूतन प्रतिमान गढ़े।
निज गौरव के नवल प्रखर सोपान चढ़े।
निस्पृह,निर्मल,नहीं रखा अभिमान सदा।
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सरल,सहज,साहसी,सदा ही सुफल सफल थे।
राजनीति के दलदल के वे नीलकमल थे।
थे सरस्वती के वरद पुत्र, ओजस्वी वाणी।
दृढ़ प्रतिज्ञ ,साहसी, कर्म उज्ज्वल परिणामी।
था व्यक्तित्व निराला , देव समान सदा।
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जब पंतप्रधान हुए भारत का मान बढ़ाया।
भारत भू की कीर्ति ध्वजा को गगन दिखाया।
उनकी महिमा का युग युगंत तक श्रवण करें।
हम भारत वासी नित चरणों में नमन करें।
थे भारत मां की परम श्रेष्ठ संतान सदा।
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©धीरेन्द्र कुमार जोशी
महू, इंदौर मध्य प्रदेश
9826079400

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