रूप नहीं रूह है यह , विश्व में चर्चित कृति की ,की साक्षी बेटी ,बेला को कृति भेंट करते डॉ रामशंकर चंचल

आज डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी अद्भुत बेहद चर्चित विश्व कृति, रूप नही रह है यह, की जीवंतता और सजीवता का साक्षी , उसके पावन पवित्र रिश्ता दोस्ती की साक्षी बेटी बेला संकेत नागर को पहली बार यह कृति भेंट की कृति इतनी लोकप्रिय हो गई थी कि डॉ रामशंकर चंचल के पास खुद की यह अद्भुत कृति नहीं थीं इतना ही नहीं प्रकाशक इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई के सागर जख्मी साहब के पास भी मात्र दो बच्ची थी
डॉ रामशंकर चंचल के आग्रह पर उन्होंने दोनों कृति उन्हें भेज दी
आज जेबी उनकी बेटी बेला संकेत नागर पिता से मिलने सुसराल से आईं तब डॉ रामशंकर चंचल ने उसे भेंट कर गर्व महसूस किया और कहां कि यह बेटी है जो हमारे रूह के अद्भुत पल की साक्षी हैं जी हमारे रूह के साथ उस समय थी जो सदियों जिंदा रहेगा हमारे रूह रिश्ता
जिसे देख बेटी बेला भी चौक कर बोल उठी थी पापा , सचमुच ईश्वर कृपा है वरदान है इतनी चाहत इतनी संवेदनशील होना,,,
यह कृति की अद्भुत सत्य काव्य उस ईश्वर अद्भुत पल का बहुत कुछ सजीव और जीवंत चित्र है जो हूं बू हूं
सामने आया है जो सभी पढ़ने वाले पाठकों के दिल और दिमाग में दस्तक देता हुआ सदियों जिंदा रहेगा यही वजह है कि यह सुखद अहसास कराती हुई कृति आज इतनी लोकप्रिय है और लाखों चाहने वालों की अद्भुत पसंद कविता है
जिसने डॉ रामशंकर चंचल को बेहद सार्थक मुकाम पर खड़ा कर दिया और झाबुआ को अमर कर दिया
डॉ रामशंकर चंचल अपनी बेटी को कृति भेंट करते हुए बोले बेटी तुम हो इन पलों की साक्षी जिसने ईश्वर के उपहार रूह रिश्ते को इतने करीब से देखा है, डॉ रामशंकर चंचल ने बताया कि एक महिला मित्र मेरी सालों की दोस्त है उसने भी एक दिन यह सुखद अहसास करता हुआ अद्भुत मित्रता का पावन पवित्र रिश्ता देखा तो चौक कर बोल उठी
सर, कितना अद्भुत है यह मात्र एक सेकंड भी लगा नहीं ,, अद्भुत है,,,
मेरे जीवन के इस अनुपम ईश्वर उपहार के मात्र दो साक्षी हैं बस बहुत है मेरी रूह के प्रति आस्था और आत्मा विश्वास के लिए उसे आराध्य पूजा अर्चना करते हुए जीने के लिए
प्रणाम कृति रूप नही रूह है यह को
प्रणाम प्रकाशक इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई को जिसने अद्भुत प्रकाशन कर सम्पूर्ण विश्व पटल पर रूह के पावन पवित्र आत्मा को रिश्ते को रखें सभी को प्रेरणा दी कि प्यार किस चिड़ियां का नाम हैं प्यार होता क्या है आदि आदि सैकड़ों सत्य से परिचय कराया
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश



