धन्यवाद तुझे, बीता साल,
तू बहुत कुछ सिखा गया।
हँसी भी दी, आँसू भी दिए,
पर हमें आगे बढ़ना सिखा गया।
तूने मुझे धैर्य भी दिया,
और खुद पर भरोसा भी।
हर मुश्किल के बीच मुझे,
नई उम्मीद की रोशनी दी।
कुछ सपने पूरे कर दिए,
कुछ अधूरे छोड़ गया।
पर हर अधूरा सपना भी,
हमें और मजबूत कर गया।
तूने रिश्तों की कीमत सिखाई,
अपनों को पहचानना सिखाया।
तूने मुझे खुद से भी मिलवाया,
और खुद पर विश्वास बढ़ाया।
आज तुझे विदा कहते हुए,
मन में कोई शिकायत नहीं।
जो मिला, वह सीख बना,
जो गया, वह बोझ नहीं।
धन्यवाद तुझे, बीता साल,
अब नया सवेरा बुला रहा है।
तेरी दी हर सीख को लेकर
हम आगे बढ़ते जा रहे हैं।
🙏योगेश गहतोड़ी “यश”




