साहित्य

  • अब तक हैं कितने दर्द सहे

    जन्नत का चैन सुकून लगे,अब फिर से लौट के आयेगा। अब तक हैं कितने दर्द सहे,इतिहास भुला ना पायेगा।। कितनी…

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  • पूर्ण हुआ राममंदिर का ख्वाब

    ** भारत ओर छोर से भक्तगण सैलाब था अयोध्या धाम में। सदियों संघर्ष का पूर्ण हुआ ख्वाबअयोध्याधाम में।। ** शताब्दियों…

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  • प्रलयज्योति

    जब दिशाओं में अंधकार का साम्राज्य छा जाता है, जब सत्य का दीप भी डगमगाने लगता है, जब मनुष्य का…

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  • विकराल वक्त

    आंधियों का जोर भी है आपदाओं का शोर भी है अट्टहास कर रहा उन्माद अब अंधकार घन घोर भी है…

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  • अकेलापन

    दिल में कई तूफान लिए, काँधों पर अरमानों की गठरी लिए, मुठ्ठी में अरमानों के पोटली थामे , चले जा…

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  • अंत एक व्यथा का (पौराणिक आख्यान)

    भाग 1 ****** आज फिर प्रतिदिन की भाँति  देवकी,अशांत थी। विगत कई  वर्षों से प्रतिपल एक अतृप्ति,एक व्यथा,को जी रही…

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  • आज के रिश्ते

    रिश्तों की नींव जब से झूँठ पर खड़ी होने लगी। परिवार बसने से पहले टूटने की झड़ी लगने लगी।। एकल…

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  • गीत

    मैया आई हूॅं तेरे द्वार मात मेरी सुन ले पुकार आवो-आवो मात हमारी बीच भंवर में नाम हमारी उसको लगा…

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  • लघुकथा “दिखावा”

    एक शाम वैष्णवी को खबर मिली कि मधुलिका अस्पताल में भर्ती है। वह तुरन्त अस्पताल पहुँची…. मधुलिका अकेली एक कमरे…

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  • रामनवमी

      आज हवा भक्ति के सुरों से महक उठी, पेड़ों पर कोयल खुशी से चहक उठी। मंदिरों में हो रहे…

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