
ये झील सी नीली आँखें
बोझिल सी…,
सूनापन लिए,
थकी हुई सी थी,
जो..,
डूबी हुई थी
यादों के भवंर में गहरे तक,
उभरी एक टीस सी अंतस से
और ,
छलक पड़ी बूंद आँसू बनकर
इन झील सी नीली आँखों से ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब

ये झील सी नीली आँखें
बोझिल सी…,
सूनापन लिए,
थकी हुई सी थी,
जो..,
डूबी हुई थी
यादों के भवंर में गहरे तक,
उभरी एक टीस सी अंतस से
और ,
छलक पड़ी बूंद आँसू बनकर
इन झील सी नीली आँखों से ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब