साहित्य

समय की कीमत

जयचन्द प्रजापति 'जय'

समय की कीमत
जो नहीं समझते
जीवन भर पछताते

जो समय को गंवाते है ं
समय उसको गंवा देता है

समय की ताकत
नेस्तनाबूद कर देगी
तुम्हारी औकात को

महलों में रहने वालों को
फुटपाथों पर सुला देती है

समय जिस पर वार करता है
फिर कभी नहीं उठ पाता है


जयचन्द प्रजापति ‘जय’
जैतापुर, हंडिया, प्रयागराज

कविता का भावार्थ…

यह कविता ‘समय की कीमत’ जयचन्द प्रजापति ‘जय’ द्वारा समय की अनमोलता और उसकी अटल शक्ति पर आधारित है। कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति समय का मूल्य न समझे, वह जीवन भर पश्चाताप करता रहता है। समय को व्यर्थ गँवाने वाले को स्वयं समय भी त्याग देता है, अर्थात् अवसर हर लेता है।

समय की प्रबलता इतनी है कि वह व्यक्ति की हैसियत को नेस्तनाबूद कर देती है—महलों में राज करने वालों को फुटपाथों पर लिटा देती है। और जिस पर समय का प्रहार हो जाए, वह कभी पुनः खड़ा न हो पाता। कुल मिलाकर, कविता समय के सख्त नियम को चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करती है: इसे सम्मान दो, वरना यह तुम्हें नष्ट कर देगा।

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