
सर्दी बहुत है, बच के रहना है,
दूसरों के बारे में क्यों सोचना है,
अपनी सेहत का ख्याल रखना है,
हर पल प्रभु का नाम जपना है।
कर्तव्य पथ पर अडिग चलना है,
दीन दुखी का आसरा बनना है,
प्रेम-भाईचारा निभाते रहना है,
नीति और नियत शुद्ध रखना है।
वर्ष का ये अंतिम मंगलवार है,
कल वर्ष का अंतिम बुधवार है,
गुरुवार को पहली जनवरी है,
नये साल की शुभ शुरुवात है।
जाने वाले इस वर्ष को सलाम,
आने वाले नव वर्ष को प्रणाम,
प्रेम स्नेह सिक्त मेरी भावनायें,
भेजा है नववर्ष की शुभकामनाएँ।
सारे जग से तिमिर मिट जाए,
चहुँदिशि हरीतिमा जगमगाये,
सूर्यदेव प्रकाश किरणें फैलायें,
आदित्य नववर्ष की खुशी
मनायें।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ:




