साहित्य

रामनवमी

संगीता वर्मा

अयोध्या मे राम पधारे
कौशल्या के राजदुलारे
श्याम वर्ण की काया में
सुर्य सा तेज मूख में।

ललाट पर टीका हैं सुशोभित
नील सरोवर से नयन हैं
अधरों पर कलिया मुस्कुराती
राम लला को सब देख मोहित हैं।

घुंघराले से केश लटक रहे हैं
शरीर पर पिताम्बरी सोहे
गले में फूलों‌ की समोहित हैं
चरण कमल पंखुड़ी से भी कोमल।

रघुनंदन के लिये फूलों‌ से
पथ को सजाया हैं
कर रही इन्तजार रामलला की
सारी दुनिया दर्शन को दिवानी‌ हैं।

आएगा अब राम राज्य
क्यूंकि प्रभु आ गये अपने धाम को
भाग्य हमारे रामलला पधारे।

उनके चरणों मैं सारा जग समाहित हैं
खूब नैन भर भर कर देखो
मेरे रामलला की माहिमा
निराली हैं…।।

संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश

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