साहित्य

आजमाने चाहिए

शेख रहमत अली 'बस्तवी'

मुझे वो यार पुराने चाहिए,
सभी गुज़रे ज़माने चाहिए।

गाँव, मस्जिद , शिवाला,
नहीं उनको भुलाने चाहिए।

बड़े अनमोल रिश्ते हैं यहाँ,
गले उनको लगाने चाहिए।

जो खुद को तोप कहते हैं,
उन्हें भी आजमाने चाहिए।

यही मजहब सिखाता है,
सभी से दिल लगाने चाहिए।

शेख रहमत अली ‘बस्तवी’
बस्ती (उ. प्र.)
7317035246

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!