
आपका मेहमान हूँ
आप मुझे संभालिए
मैं पीता हूँ बहुत,
मय जिन्दगी के लिए
जिंदगी की अंजुमन,
का बस यही दस्तूर है
वो मेरे करीब तो हैं
पर तू मुझसे दूर है
दिल पे गम का बोझ है
लम्हा लम्हा टूटा हूँ
अब लफ्जों में क्या बयां करूँ
खुद से खुद के लिए रूठा हूँ
नम है आँखें गरम है आँसू
बस पाने की है आरजू
मनोज कुमार यकता
गोण्डा उत्तर प्रदेश




