
मन रे प्रभु को अर्पण हो जा
तज दे मन से देरिर्श के भाव
तू मालिक का हो जा
मन रे प्रभु को………
काम क्रोध मद लोभ को तज दे तज दे हेरा फेरी
साथ ना देंगे एक पल तेरा करता मेरा मेरी
नेह लगा ले इस प्रभु से ओर इसमें तू खोजा
मन रे प्रभु को……………
चार दिनों की है जिंदगानी क्यू
करता बंदे बेमानी
है सराय दुनिया सारी जिंदगी तो एक दिन मिट जानी
रह ले सबसे मिलकर बंदे सुख में निसदिन सो जा
मन रे प्रभु को…………….
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद,उत्तर प्रदेश




