साहित्य

अटल वाणी

कार्तिक नितिन शर्मा

अटल वाणी बोलिए जो सर्वविदित हो जाए
भारत की इस विविध एकता से सिर गर्वित हो जाए।
आज समय है विविध एकता और सद्भाव में सब समाहित हो जाए।
सत्य अटल है अटल सत्य है
बस इसका मंथन हो जाए
मानव के भीतर जो मद शत्रु है उसका ‘अरि’ मर्दन हो जाए ।
अटल वाणी बोलिए जो सर्वहित हो जाये।
श्वांस अटल विश्वास अटल है।
उच्छश्वांस अटल हो जाए।
एकता और विश्वास की डोर में सद्भाव अटल हो जाए।
अटल वाणी बोलिए जो सर्वविदित हो जाए।

अटल अमर है अटल अमिट है
अटल आत्म अजर हो जाए।
अगर देश में भ्रष्टाचार के जडत्व मुक्त होगा
जब देश में अटल विचारविमर्श होगा
अटल वाणी विचार की क्रान्ति है।
जीवन की नहीं ये विश्रान्ति है।
जो आये उन को गले लगाया
सद्भाव में सभी को रहना”
सिखाकर अटल जन्य बतलाया।

इन पंक्तियों में अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत की एकता, सद्भावना, और अटल विश्वास की भावना को व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि अटल वाणी बोलने से सर्वहित होगा, और एकता और विश्वास की डोर में सद्भाव अटल हो जाएगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के जडत्व से मुक्ति के लिए अटल विचारविमर्श की आवश्यकता पर बल दिया है।

कार्तिक नितिन शर्मा

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