
झाबुआ मध्य प्रदेश में आदिवासी पिछड़े अंचल में जब कोई स्वर संगीत कला सहित साहित्य की उपलब्धि लिए देश दुनिया को चौका देता है तो सचमुच वंदनीय हैं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है
ये यह हमारे बड़े भाई साहब अवधेश त्रिवेदी जी रिश्ते में भाई है पर हम सैकड़ो बार कहा चुके हमें एक ही रिश्ता दोस्ती का स्वीकार है और ये हमारे खास मित्र है जो जन्म से है
अक्सर उन्हें सुनता हूं अच्छा बहुत ही अच्छा लगता हैं बहुत कम बोलते है अपने में रहते हुए लगे रहते हैं और यही किसी साधना और तपस्या का मंत्र है खैर साहब दिल को छू जाता है उनका स्वर चयन गीत खजाना समेटे है अपने स्वर में उम्दा प्रस्तुति के साथ अनेक अनेक स्वर मालिकाओं के साथ स्वर दिए है और लाखों चाहने वालों को सुख सुकून दिए है धन्य धरा झाबुआ धन्य हुआ जीवन धन्य एकांत जो इंसान को प्रतिभा धनी बना देता है तीसरा नेत्र खुल जाता हूं सब की हां हां से दूर खुद का सोच और चिंतन पैदा होता हैं कुछबनाना है तो भीड़ से कोसों दूर रहे भीड़ में व्यक्ति भीड़ जैसा हो जाता है बेहतर है बिना कोई चाह के अपने सुख सुकून के लिए लगे रहे साधना में सुख सुकून में बाक़ी राम जाने हमें तो कुछ नहीं चाहिए हम अपनी मस्ती में अपनी खुशी में गाते हैं और सुकून पाते है यहां है आदरणीय अवधेश त्रिवेदी जी की अद्भुत सोच अच्छा लगता हैं
बधाई और बधाई उन से छोटा हूं सोच सकते है किस उम्र में क्या कमाल कर रखा है और लाखों चाहने वालों को सुख सुकून दे रहे हैं
वंदन उन्हें उनकी अद्भुत स्वर साधना को तपस्या को सत् सत् प्रणाम
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




