
नफ़रत के शहर में प्यार की बातें
सुकून दिल को नहीं मिलता,
फिर क्यों कहांँ की बातें!!
ख़्वाहिशों से भी डर लगता है मुझे
एक आप और एक आपकी बातें!!
किस कसूर की सज़ा दी मुझको
समझना है मुझे तुम्हारी बातें!!
आग दिल में मैं भी लगा सकता था
मुद्दत से दिल उदास है,इस पर घाते!!
जिसने तन्हा गुज़ार दी हो,
क्या करें हम उनकी बातें!!
दिल ही दिल में उदास रहते हैं
सुकून दिल को नहीं उफ़ तन्हा रातें!!
दिल फिर से तुम्हारी बातों में आ गया
झगड़ा तुम ही से है और
तुम ही हो सांँसे!!
तुम्हारे रहम-ओ- करम पर है ज़िन्दगी
तुमने भी छोड़ रखी है करनी बातें!!
चला गया छोड़कर जाने वाला
साथ ही चली गई उनकी सारी बातें…
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




