
जन्म जन्मांतरों का संगम
जन्म–जन्मांतरों का संगम, आत्माओं का मीत पुराना,
समय की धारा में बहता, अपना पावन सा अफसाना।
मिलन हुआ था पहली बार, जैसे कोई सपना अपना,
धड़कनों में बसा हुआ था, जन्मों का रिश्ता सलोना।
मिल कर बिछड़ गये, करना तुम इंतजार,
जन्म-जन्मांतरों का संगम अपना बेकरार।
स्मृतियों की शीतल छाया, मन को सहलाती रहती,
अधूरी सी हर एक कहानी, फिर से बुलाती रहती।
दूर सही पर पास वही हो, हर आहट में तुम मिलते,
सांसों के हर एक सफर में, चुपके से संग चलते।
भाग्य लिखे जब नई कहानी, फिर मिलना निश्चित होगा,
प्रेम दीप जो जलता मन में, कभी न वो मंद होगा।
समय के पथ पर चलते-चलते, फिर संगम हो जायेगा,
सूनी राहों का हर कोना, हँसकर गीत सुनायेगा।
विछोह नहीं बस एक पड़ाव है, जीवन की इस धारा में,
मिलन हमारा लिखा हुआ है, हर जन्म की बहारा में।
जब भी तुम स्मरण करोगे, मन मेरा पास आ जाये,
जन्म-जन्म का पावन बंधन, फिर से फूल खिला पाये।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




