
“वीर अरु गंभीर अटल,दिव्य पुरुष थे खास।
अटल गाथा अमर रहे, अटल अडिग इतिहास।।
बचपन से ही देश प्रति,भक्ति प्रेम का भाव
अमर वीर बालक अटल, मानस रखे लगाव।।
सेवा भाव दया रखकर,किया सुखों का त्याग।
बचपन से क्रांति मन में,देशप्रेम की आग।।
दीन दुखी को देखकर,होता था संताप
भारत बंध मुक्त रहे,चिंतन करते आप ।
तजकर माया मोह सब,सेवा धर्म निबाह।
भारत नव निर्माण की,हर क्षण मन में चाह।
अटल मन से थाम लिया, निज कर क्रांति मशाल।
बुद्धि प्रतिभा के बल पर,देश हुआ खुशहाल ।।
हुआ मुक्त बंधन कटे,देश हुआ आजाद ।
अटल इरादों साथ ही,अटल वीर हैं याद।।
आज जयंती वीर की,अटल बिहारी संत।
तुलसी का पूजन करें ,नमन अटल भगवंत।।
डॉ. नवनीता दुबे नूपुर©®✍️ मंडला,मप्र।




