
अटल स्वभाव के धनी अटल जी,
थे भारत भू के दसवें प्रधानमंत्री।
जिनके बहुमुखी व्यक्तित्व के सम्मुख,
झंकृत थी जन जन की हृदय तन्त्री।।
पच्चीस दिसंबर को 1924 को,
पावन हुई धरा ग्वालियर नगर की।
जब जन्में दिव्य गुणों के धारक,
अपने माननीय बाजपेई अटल जी।।
कवि हृदय से निर्झर निर्झरणी,
सबके भावों को जागृत करती।
पीड़ित, तृष्इत व्यथित जग हित,
जिनकी लेखनी थी सतत चलती।
भारत के इन भूषण को मिला,
भारत भूषण भारत रत्न सम्मान।
सम्मान स्वयं हो गया सम्मानित,
दे अटल जी को यह सम्मान दान।।
प्रखर वक्ता इन कवि हृदय ने,
दी भारत को वैश्विक पहचान।
और इनके निर्देशन में अपना देश,
नित नित चढ़ा नव उन्नत सोपान।।
पोखरण परमाणु परीक्षण करवाया,
व चलाई चतुर्भुज स्वर्ण योजना।
पांच वर्ष तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री ,
बने आप ही श्री श्रेष्ठिवर महामना।।
सतत न रहता कोई यहां पर,
आप भी गए हम सब को छोड़कर।
पर अपने उत्कृष्ट कार्य, व्यवहार से,
हर हृदय में बसे आप नेह जोड़कर।।
नमन आपको शत शत नमन है,
कभी न विस्मृत होंगे कवि श्रेष्ठ।
अपनी लेखनी व अपने भावों से,
पाया आपने सबका प्यार यथेष्ठ।।
ममता श्रवण
अग्रवाल
सतना मध्य प्रदेश
839087003


