साहित्य

विजय दिवस

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

जिस धरती ने जन्म दिया,
उस पर ही अर्पित प्राण हुए,
हिमगिरि की ऊँची चोटियों पर
भारत माँ के मान बढ़े महान हुए।

बर्फ़ जमी थी साँसों पर भी,
डिगा न वीरों का विश्वास,
माँ के चरणों की रक्षा में
हँसकर दे दी हर एक श्वास।

कारगिल के रण में गूँज उठा
वीरों का जय-जयकार,
ऑपरेशन विजय ने लिख डाली
शौर्य-गाथा अपार।

सीने पर तिरंगा बाँधे
बढ़ते थे रणवीर महान,
गोली से भी न डिगे कदम,
अचल रहा उनका अभिमान।

घर में घुसे घुसपैठियों को
सरहद पार भगाया,
फौलादी दुश्मन की चालों को
वीर लाडलों ने मिटाया।

प्राण दे कर भी शान बढ़ाई
भारत की आन, पहचान,
दुश्मन के उड़ गए थे होश
देख वीरों का पराक्रम-ज्ञान।

हँसते चमन के फूल बने तुम
माँ के लिए बलिदान,
जग अचंभित रह गया देख
वीरता का अनुपम गान।

विजय दिवस यह कहता हमसे
जागो, एकता धारो,
शहीदों के अमर संदेश को
जीवन में उतारो।

नमन नमन उन वीरों को
जिनसे देश महान,
उनके बल पर ऊँचा लहराए
आज भी तिरंगा शान।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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