साहित्य

फसाने से आदमी

कनक

फसाने से आदमी ज़्यादा यहां बीमार मिलता है
मुहब्बत में सनम जाने लगा दिलदार मिलता है।।

जमाने में ख़ुदा मेरा सहारा भी नहीं कोई
बुराई का जो आलम है वो तो दमदार मिलता है।।

वफ़ा में आदमी ख़ुद यार क्या करता कभी उल्फ़त
इंसानी कहर में वो आदमी खूंखार मिलता है।।

जिसे देखो वही हमको तो समझदार बना देता
जमाने में मगर कुछ भी नहीं इंकार मिलता है।।

परेशा हैं सभी देखो सितारे देख कर जाने
सभी खूंखार पर कुछ पास मददगार मिलता है।।

कनक

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