साहित्य

गाँव पर फायकू

डाॅ.शिवेश्वर दत्त पाण्डेय

1
खेत खलियान लहराए आज
इनार का संगीत
तुम्हारे लिए

2
बरगद वाली गहरी छाँव
पीपल की धुन
तुम्हारे लिए

3
नदी किनारे बहता सुकून
लहरों का स्पर्श
तुम्हारे लिए

4
माटी की नर्मी बोल उठी
गाँव का आँगन
तुम्हारे लिए

5
हर भोर का सुनहरा रंग
पगडंडी की स्मृतियाँ
तुम्हारे लिए

6
पीपल पत्तों की सरगम
झोंकों की तान
तुम्हारे लिए

7
बरगद फैला बाहें अपनी
मिटाता पथिक थकान
तुम्हारे लिए

8
खेत सुनाएँ सुख की बातें
माटी का हर्ष
तुम्हारे लिए

9
इनार सुधा जल भर लाया
घट की गुनगुन
तुम्हारे लिए

10
नदी उमंग भरी कथा कहे
लहरों को चूम
तुम्हारे लिए

11
धूप खड़ी पगडंडी पर
दिन का मौसम
तुम्हारे लिए

12
मोर नाचे गाँव की छत पर
सावन लय-छंद
तुम्हारे लिए

13
पग पग पर बसती यादें
माटी की धुन
तुम्हारे लिए

14
साँझ ढले दीपों की पंक्ति
घर का उजास
तुम्हारे लिए

15
चूल्हा फूँक रसोई महके
धुएँ की गंध
तुम्हारे लिए

16
बगिया में खिले कचनार
फूलों का रंग
तुम्हारे लिए

17
तट पर बैठी शांत हवाएँ
संगीत का असर
तुम्हारे लिए

18
खलिहान में भरी फसलें
आशीष देता ग्राम
तुम्हारे लिए

19
गोधूलि में चरवाहों का दल
घंटी का राग
तुम्हारे लिए

20
स्वप्नों जैसा निर्मल गाँव
जीवन का स्पर्श
तुम्हारे लिए

डाॅ.शिवेश्वर दत्त पाण्डेय
रुडकी,उत्तराखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!