
ॐ जय शिव ओंकारा,प्रभु हरि शिव ओंकारा -2
प्रतिमाह, निशिदिन जो तुमको पूजे,
फल पावे आजीवन, नित जो ध्यान करें,
सुंदर,सत्य औ शिव भाव की धारा।
ॐ जय शिव ओंकारा,प्रभु हरि शिव ओंकारा
भांग,धतूरा, और बेलपत्र साजे,
जलाभिषेक संग बहे दुग्ध-धारा,
मन के भाव चढ़ावें प्रियजन,
मिल सब संग बोलें जयकारा।
ॐ जय शिव ओंकारा,प्रभु हरि शिव ओंकारा।
तुम सा नहीं कोई कृपा निधान,
ना तुझ सा है कोई दंड विधानक,
न्यायमूर्ति का रूप निराला,
तू ही तो है सर्वस्व निहारा।
ॐ जय शिव ओंकारा,प्रभु हरि शिव ओंकारा।
रचयिता –
सुषमा श्रीवास्तव,रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।



