बिहार

“गीत-ग़ज़ल एवं चित्रकला — दोनों में समान अधिकार रखती हैं स्वराक्षी स्वरा” : सिद्धेश्वर

पटना ( प्रस्तुति : बीना गुप्ता ) नदियों का कल-कल, पंछियों का कलरव, भँवरे का गुनगुन, बारिश की रिमझिम, बादलों की गड़गड़ाहट, हवाओं की सरसराहट, बिजली की कड़क, माँ की थपकी, दादी की लोरी, पिता की गर्जना, हृदय की धड़कन और श्वासों की गति — हर ध्वनि में संगीत समाया है। जब इन्हीं प्राकृतिक दृश्यों को कला की दृष्टि से देखते हैं तो अद्भुत सौंदर्य प्रकट होता है। गीत-ग़ज़ल के साथ-साथ चित्रकला में समान अधिकार रखने वाली रचनाकार कलाकार स्वराक्षी स्वरा इसी अद्भुत समन्वय की सृजक हैं।
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में, व्हाट्सएप के अवसर साहित्य यात्रा पेज पर आयोजित अवसर साहित्य पाठशाला सह कार्यशाला के 59वें एपिसोड में संयोजक सिद्धेश्वर ने संचालन करते हुए उपरोक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा —
“हमें प्रसन्नता है कि इस पाठशाला से अनेक नए रचनाकार जुड़ रहे हैं और इससे लाभान्वित हो रहे हैं।”
अवसर साहित्य यात्रा के अंतर्गत प्रति माह के प्रथम सप्ताह को संगीत एवं कला सप्ताह के रूप में मनाया जाता है, जिसमें देशभर के रचनाकार अपनी चित्रकला, संगीत और फोटोग्राफी प्रस्तुत करते हैं। आपसी विचार-विमर्श और टिप्पणियों के माध्यम से यह आयोजन कार्यशाला का रूप ले चुका है।
आज फेसबुक के अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका पेज पर आयोजित लाइव चित्रकला एवं कला सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सिद्धेश्वर ने आगे कहा—
“इस मंच का उद्देश्य कला और साहित्य को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्रदान करना है।”
इस अवसर पर उन्होंने सुप्रसिद्ध लेखिका एवं चित्रकार स्वराक्षी स्वरा से संक्षिप्त संवाद भी किया। स्वरा ने कहा —“आज जब साहित्य में गुटबाज़ी और खेमेबाज़ी हावी है, जहाँ पैसे लेकर मंच दिए जाते हैं, वहाँ आपका यह निःस्वार्थ प्रयास प्रशंसा से परे है। आप साहित्य और साहित्यकार दोनों की सेवा कर रहे हैं।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. शरद नारायण खरे (मंडला, मप्र) ने ऑनलाइन मुकेश का एक सुरीला गीत सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा —
“संगीत मानसिक स्वास्थ्य की संजीवनी है। यह तनावों से बचाता है और जीवन-संघर्ष की शक्ति प्रदान करता है। चित्र हमसे संवाद कर चेतना जगाते हैं तथा साहित्य रचना को प्रभावी बनाते हैं। कहानी-कविता के साथ रेखाचित्र सृजन की प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ा देते हैं।”
कार्यक्रम में —पूनम पांडेय, निर्मला कर्ण, जयंत, सिद्धेश्वर, मुरारी मधुकर, पूनम श्री, विज्ञान व्रत, बालेश्वर गुप्ता, गोपाल सिंह (हॉन्ग कोंग), सुषमा सिंह, राज प्रिया रानी, अपूर्व कुमार, सुनीता जागृति, प्रियंका श्रीवास्तव, नरेश कुमार आस्था, अनीता मिश्रा सिद्धि, सिम्मी श्रीवास्तव, सपना चंद्रा, इंदु उपाध्याय, पूनम वर्मा आदि की विशेष भागीदारी रही।
अंत में, प्रभारी राज प्रिया रानी ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपनी मधुर आवाज़ में एक गीत प्रस्तुत किया।
इंदु उपाध्याय, गजानन पांडेय, सिद्धेश्वर और विजयानंद विजय ने भी फिल्मी गीतों की प्रस्तुति दी।
ऑनलाइन कला प्रदर्शनी में विज्ञान व्रत, अयांश राज, स्वराक्षी स्वरा, आनंद, राज प्रिया रानी आदि की कलाकृतियाँ दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करती रहीं।
मनीषा सहाय, रामकुमार घोटक, सपना चंद्रा, सुभाष, विजय आनंद, आशीष, विजय पदममुख पांडा, पुष्प रंजन आदि की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस लाइव प्रस्तुति के दौरान यह अनुभव हुआ कि साहित्य, कला और संगीत के मध्य अद्भुत अंतरंगता है। इसी समान संवेदनशीलता को संयोजक सिद्धेश्वर कुशलता से दिशा प्रदान कर रहे हैं। विदेशों के कलाकारों की रुचि और सहभागिता इस मंच का गौरव बढ़ा रही है।

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