
ग़ज़ल
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बहुत मुश्किल दिनों में वह हमारे काम आती है।
दवाएं भी, दुआएं भी हमारे काम आती है।
विरासत में मिली है जो कमाई मुझको पुरखों से,
वही सच्चाई की दौलत हमारे काम आती है।
वह रिश्ते प्यार के सारे खुशी लेकर के आते हैं,
कभी सुख की सदाएं भी हमारे काम आती हैं।
सफर यह ज़िन्दगी का बस मुकम्मल चार दिन का है,
उसे छूकर गुजरती यह हवाएं काम आती हैं।
गमों की धूप में चलकर पड़े पांवों में छाले जब,
कभी बादल कभी बारिश हमारे काम आती है।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890




