
आसान नहीं होता इतना, जन्म ले इंसान बन जाना ।
होते हैं संग हमारे अपने ही कर्म और व्यवहार सदा।
आदमी का तन मिला है क्यों पहचान अपनी भूले हो ?
दोगले व्यवहार से अपने तुम क्यों मासूमों को छले हो ?
मिली है सुकर्मो और किस्मत से ये खूबसूरत ज़िन्दगी ।
करें नेक कार्य और चुने राह भी सत्य- परोपकार की ।
आओ मिलकर करें हम बन्दगी उस सर्वोच्च परमेश्वर की।
जीवन के सफ़र में जिसने राह दिखाई सदा रोशनी की।
मानव जीवन मिला है सद्कर्मों से मूल्य इसका पहचानो ।
झूठी आन- बान- शान छोड़कर संग सबके तुम मुस्कुराओ।
आए हैं इस जगत में तो क्यों न कर कुछ ऐसा जाए ।
याद रखें हस्ती हमारी दुनिया साल हर साल दिल से।
मोहिनी गुप्ता राजगढ़ मध्य प्रदेश




