

जय जय पतित पावनी वृन्दा। करते दुष्ट तुम्हारी निंदा ।।
वृंदावनी तुम विश्वपावनी । श्रीकृष्ण को अति भावनी ।।
विश्वपूजिता पुष्पन सारा । नंदिनी आनंद देत अपारा ।।
कृष्णजीवनी संतन की हुलसी । जय जय हो मां मेरी तुलसी ।।
मक्खन मन मोहनहि मिलाओ । सदा प्रेस से तव यश गाओ ।।
नामाष्टक जो कोई गावे । अश्वमेध का फल सोई पावे ।।
डा राजेश तिवारी मक्खन झांसी उ प्र




