साहित्य

आपकी याद आई है

विद्या शंकर विद्यार्थी

जन्म दिन के बहाने, आपकी याद आई है
और बीते हुए उन दिनों की संवाद लाई है
जीवट बन जाती है आदमी की स्मृतियां
त्रस्त है आदमी रोटी की फरियाद लाई है।
आप होते तो करते जरूर कुछ समाधान
आप जैसे आका आने नहीं देता व्यवधान
पेड़ कट रहे हैं और बस्ती भी उजड़ रही है
अफसोस कि हमरा अटल नज्ञी रहा प्रधान।
धूप कमजोर पड़ती जब आप विद्यमान होते
जिम्मेवारी निभाते लापरवाही में नहीं होते
अफसोस हमरा आका आज हमसे दूर है
गरीब के बच्चे आज दिन चिथड़े में नहीं रोते।
विद्या शंकर विद्यार्थी रामगढ़, झारखंड

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