साहित्य

मेरे एहसास

तृषा सिंह

कुछ एहसास महसूस किए जा सकते
उन्हें शब्दों में बयां हम नहीं कर सकते
ये एहसास सीमित नहीं होते
ये तो बेहिसाब और बेमिसाल होते हैं
मैंने तुम्हें इतना पाया कि हर एहसास
में घुलकर मिल गए हो
इनमें एक उम्र गुजर जाऐगी
वक्त रेत की तरह फिसलता गया
पर एहसास आज भी वहीं हैं ।

तृषा सिंह
देवघर, झारखंड

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