
नई साल की नई किरणों की आगाज
अबंर पे हॅंसते खेलते नई दिन में परवाज
कितना पावन है सन छब्बीस की विहान
जग में में खुशहाल रहे नई साल में इन्सान
बीते साल पच्चीस ने जग को है रूलाया
ईष्या द्वेष वैमनस्यता का जाल फैलाया
नये साल में जग वाले कभी ना हो परेशान
सन्मति का दो प्रभु सब जन को वरदान
जन जन में फैले दोस्ती का नया पैगाम
समाज से प्रेम भाव ना होने पाये गुमनाम
किसी की इज्जत ना होवे कभी बदनाम
ऐसा वर दो जन जन को हे भगवान
नये साल में नई इतिहास हम रचायें
संसार को नित्य नई विज्ञान सिखलायें
बम बारूद युद्ध से अब दूरी ही बनायें
विश्व हित में विश्व शांति का पाठ पढ़ायें
विकास की बात की करना है प्रयास
एक दुजै पर हो विश्व का सब पे विश्वास
हर प्राणी में हो प्रेम प्रीत की निवास
सत्य पथ का हर प्राणी हो जग में दास
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




