अंगरेजी साल बीतल आपन सम्वत नाही,
ग्रेगेरियन वर्ष बीतल सनातनी काल नाही
सकल पदारथ ऐहिं जग माहीं, करम हीन नर पावत नाही,
समरथ के नाही दोष गोसाईं,रवि पावक सुरसुरी के नाही
करिजुग में सतजुग आई नाही, धरम भुलाइल अचरज नाही,
वेद उपनिषद गीता ग्यान भुलाई, ककहरा भी सुहावत नाही
धरम-आध्यात्म ओनहें नाही चाहीं, गंगा मैया भी ओनके माई नाही,
ओनके बंदे मातरम उद्घोष सुहावे नाही,अखंड भारत बदे नीयत नाही
कहलन बनारसी बाबू ! जगा लS जमीर बाबू, हिंदुस्तान भी अब सुरक्षित नाही,
अल्पसंख्यक बन जइबा जे दिने,
फेर कछु तोहार ईहां बची नाही
✍️अपूर्व नारायण तिवारी ‘बनारसी बाबू’©




