
यह ग्वालियर की भूमि मां की गोद धन्य थी।
कृष्ण बिहारी तात, कृष्णा मात धन्य थी।
साहित्य मालामाल यूं तुमसे अटल हुआ।
संसद में काव्य गूंजता संसद भी धन्य थी।
सम्मान पद्म विभूषण था धन्य हो उठा।
भारत रत्न का सीना गर्व से चौड़ा हो उठा।
गर्वित यूं लोकमान्य तिलक सम्मान हुआ था।
वह सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान पा गया।
बस यात्रा लाहौर को तुमने ही की शुरू।
बनने लगा तब देश अपना था विश्व गुरु।
स्वर्ण धमनियां सड़क भी तुमने अटल गढ़ीं।
परमाणु परीक्षण पोखरण में कर शुरू।
सारा ज़माना आपका गुणगान गा रहा।
देखो हिमालय आपको मस्तक झुका रहा।
पाकर तुम्हें अटल जी धन्य हो गई धरा।
रेखा सकल गगन भी झूम देश गान गा रहा।
रेखा रानी
विजय नगर गजरौला
अमरोहा, उत्तर प्रदेश।




