आलेख

पेंशनर्स के शोषण पर लेख

ऐ जाते हुए किरदार और आने वाले साल,पेंशनर्स से ले लो नया पैगाम...............!

मदन वर्मा “माणिक”

ऐ जाते हुए किरदार और आने वाले साल,
पेंशनर्स से ले लो नया पैगाम……………!
ये सरोकार ना होता तो क्यों लिखता। हम भी मानव है इसी समाज में रहते हैं जिसमें आप रहते हों, जिसमें सरकार मुखिया और उनके अनेक सरदार भी रहते हैं। जैसा उनका पेट, परिवार
और आवश्यकताऐं होती है, वैसे ही इन सरकारी पेंशनर्स की भी होती है। मगर पिछले करीब पांच वर्षों से शोषण कर इनके हकों
को मारा जा रहा है। इनको मिलने वाली महंगाई राहत बार-बार देरी से देकर ही नहीं बल्कि 8-9 माह की राहत का अंतर भी नहीं दिया जाता है, इस तरह उनसे हजारों रूपयों की बकाया राशि का नुकसान किया जाता है। इस तरह नियमित कर्मियों व पेंशनर्स में भेदभाव हर बार जारी है, वह भी इस मध्यप्रदेश – छत्तीसगढ़ राज्यों के पेंशनर्स के साथ जो कि सरासर पेंशनर्स के सुरक्षित जीवन के साथ अन्याय है।

मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ राज्य के बटवारे की धारा 49(6) वर्ष 2000 के पूर्व सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर लागू होती है किन्तु शासन के कुछ अधिकारियों के द्वारा इसकी गलत व्याख्या कर इसे 2000 के बाद सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों, पेंशनर्स पर भी लागू कर दी गई थी। इस कारण आज 25 वर्षों से पेंशनर्स लगातार परेशान हो रहे हैं। उनके साथ इस धारा के नाम से लम्बे समय से भेद-भाव हों रहा है।

पेंशनर्स पर ये अनोखा प्रयोग बहुत ही कुठाराघात है जिसका अंत
आज तक ना तो मप्र-छग सरकारों ने किया, ना ही केंद्र सरकार को पेंशनर्स के इस नुकसान की रोकने की पहल कोई नुमाइंदे नहीं कर सके। इनके प्रयास ही पेंशनर्स का राहत का महादर्द मिटा सकते हैं। यों तो मप्र-छग में लगभग पच्चीस पेंशनर्स यूनियनें मौजूद है लेकिन उपबंध 49.6 की स्थिति को अब तक दोनों शासन के सम्मुख स्पष्ट हल की पहल करने की ओर दबाव बनाकर अग्रसर नहीं कर सके। पेंशनर्स बढ़ती महंगाई में बहुत कष्टपूर्ण जीवन जी रहे हैं किसी तरह अपनी व अपने परिवार की
जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं।

करीब आठ लाख पेंशनभोगियों को व उनके परिवार जनों पर
ये अन्याय कब तक होगा। अगर, अन्याय भुगत रहे हैं तो इन
दोनों राज्यों के सरकारी ओहदेदारों और नेतृत्वकर्ताओं को
महज सरमायेदार बन मौन धारण रखना क्या, उचित होगा।
कुछ करते क्यों नहीं, ऐसा दोनों राज्यों का पेंशनर्स सदस्य व उनका परिवार पूछता है? पेंशनर्स समस्या राहत की क्या दोनों राज्य केंद्र सरकार के सहयोग से हल नहीं करा सकते। इसके लिए किसी ने संकल्प लिया क्यों नहीं, अब तो पिछला साल भी बीत गया। नये साल में सब मिलके कौनसा फलसफा दिखाओगे? सुनो-सुनो, ऐ जानेवाले जरा, नये तक पहुंचा दो
पयाम, ऊपरवाला भी यह सितम देखकर हो रहा हैरान! पेंशनर्स मांग रहा है भीषण महंगाई में पूरी महंगाई राहत, समय पर देती क्यों नहीं सरकार, यह प्रश्नचिन्ह कोई तो खत्म कराएं, ऐसा हौंसलामंद कौन होगा नये साल में!

– मदन वर्मा “माणिक”
इंदौर , मध्यप्रदेश

(मप्र-छग के करीब आठ लाख सरकारी पेंशनर्स के हित में लेख)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!