
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने कहा था प्यार और सहकार से भरापूरा परिवार ही स्वर्ग होता है।परिवार संस्कारों की पाठशाला है।परिवार में सदस्यों के मध्य रक्त का रिश्ता होता है जो त्याग समर्पण से निभाया जाता है।परिवार में सभी सुखी सम्पन्न खुशहाल रहे इस हेतु परिवार का मुखिया सदैव चिंतित रहता है वह स्वयं भूखा प्यासा अभावों में रह लेता है लेकिन वह परिवार को सुखी व समृद्ध देखना चाहता है।परिवार मानव समाज की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी इकाई है जो सामाजिक संरचना व व्यक्तित्व का आधार बनती है।परिवार में पति पत्नी माता पिता व बच्चे शामिल होते हैं।परिवार में सभी सदस्य एक दूसरे का आर्थिक सहयोग करते हैं। परिवार में जीवन मूल्य दया सद्भाव सहयोग प्रेम से रहना जीवों पर दया करना अपनत्व की भावना से रहना सिखाया जाता है।परिवार के अंतर्गत एकल परिवार,संयुक्त परिवार, विस्तारित परिवार और मिश्रित परिवार शामिल होते हैं।
। परिवार समाज के लिए कार्य करता है।परिवार के सभी सदस्य समृद्ध खुशहाल होते हैं तो समाज भी स्वस्थ व खुशहाल होता है।पारिवारिक सुख सगंती5 हेतु परिवार के सदस्यों के मध्य आपसी स्नेह विश्वास व सम्मान की भावना होना चाहिए।
परिवार में सबसे अधिक उम्र के सदस्य को मुखिया कहा जाता है।उनके मार्गदर्शन व आदेश को सभी परिवार के सदस्य मानते हैं।सभी उनका आदर सम्मान करते हैं। परिवार में विवाह या अन्य बड़े आयोजन हो तो उनकी सहमति उनके निर्देशन में परिवार के कार्य सम्पन्न होते हैं।परिवार के बड़े सदस्य छोटो को सही राह पर चलना सिखाते हैं।
धार्मिक धार्मिक रीति रिवाज,संस्कार ,रिवाज,रस्मो के बारे में बताते हैं।परिवार न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है अपितु समाज को आकार देने सुसभ्य समाज बनाने का कार्य भी करते हैं।
सांस्कृतिक मूल्यों परम्पराओ विश्वासों को एक पीढी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।परिवार समग्र रूप से समाज व समुदाय की भलाई करते हैं।
साझा निवास भावनात्मक जुड़ाव सीमित आकार समाजीकरण साझा अर्थव्यवस्था परिवार से ही सम्भव है।परिवार को मजबूत सामाजिक इकाई बनाने हेतु प्रेम स्नेह सहानुभूति सुरक्षा एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास एकता से रहना आवश्यक है।
एक खुशहाल परिवार वही है जहाँ सभी छोटे बड़े सदस्य हर समय खुशी से रहते हो।
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी, जिला झालावाड़, राजस्थान



