नीम, पीपल या हो फिर आम
एक पेड़ लगाओ मां के नाम
जिसके आंगन पेड़ नीम का
वहां न काम किसी हकीम का
जो भी करता इसकी दातून
चमकते दांत, शुद्ध हो खून
कितनी औषधि में आता काम
एक पेड़ लगाओ मां के नाम
पीपल का तो बस क्या कहना
यह तो है जीवन का गहना
ररात दिन देता है ऑक्सीजन
जिस पर निर्भर सबका जीवन
इसके नीचे मिले बहुत आराम
एक पेड़ लगाओ मां के नाम
पेड़ लगा लो अगर आम का
इसका सब कुछ बड़े काम का
इसी बात से करो अंदाजा
इसको कहते फलों का राजा
सूख जाए तो दिलवाता दाम
एक पेड़ लगाओ मां के नाम
चाहे पेड़ लगाना ,कुछ और
बांधकर रखना प्रीत की डोर
पेड़ लगाकर, भूल मत जाना
मां की याद का यही बहाना
फल और छाया देते हैं इनाम
एक पेड़ लगाओ मां के नाम
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रचयिता.. पं पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला,हरिद्वार उत्तराखंड




