साहित्य

राह के फूल

नरेश चन्द्र उनियाल

जीवन में संघर्षों से ही,
सुयश औ’ नाम मिला करते हैं,
करके ही संघर्ष राह के,
फूल सदा खिला करते हैं।

जीवन के सफर में चलते-चलते,
कांटे बहुत मिलेंगे तुझको,
फूल राह के ही सुख बनकर,
तेरी सफलता को कहते हैं।

संघर्षों के बाद जो मिलता है
सुख, उसका स्वाद निराला,
कर्मवीर संघर्ष से पाए,
सुख का मजा लिया करते हैं।

दो रोटी की भूख ठीक से,
लग जाये तो चरम ख़ुशी है,
सुखी वो जो पत्थर पर लेटे,
पूरी नींद लिया करते है।

भूत भविष्यत छोड़ दीजिये
वर्तमान में सच्चा सुख है,
वर्तमान में जीने वाले,
रस आनन्द पिया करते हैं।

✍️ नरेश चन्द्र उनियाल,
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।

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