
ओ समय-सरोवर के नव-कलश!
सपनों की उजली जलधार!
मेरे बीते पलों की थकन
धो ले अपनी मृदुल फुहार।
ओ क्षण-क्षण में जन्मी आशा!
विश्वासों की धूप-सुगंध!
मेरी टूटी अभिलाषाओं को
दे नव अंकुरों का अनुबंध।
ओ मौन-वेद की नई ऋचाएँ!
जीवन-पथ का नव उद्घोष!
मेरे भीतर जो सोया था
कर दे उसको आज प्रकाशोच्छ्वास।
ओ परिवर्तन के रथ-सारथि!
संघर्षों के मौन सूत्र!
मेरी हारों को गूंथ दे
विजय के स्वर्णिम सूत्र।
शुभता के इस नव-अवतरण
तुझको मेरा प्रणाम समर्पित—
ओ नव-वर्ष! मेरी चेतना
तुझे ही आज अर्पित।
*दया भट्ट दया* खटीमा, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड)




