
यह बात ग्राम गुराडिया वर्मा तहसील जावर में चल रहे सप्त दिवसीय राम कथा के प्रथम दिवस में सीहोर से पधारे परम पुज्य गुरुदेव श्री उद्धव दास जी महाराज ने अपने सत्संग में कही। उन्होंने कहा रामायण हमें माता पिता समाज राष्ट्र और धर्म के प्रति जो हमारे कर्तव्य है उनका पालन करना सिखाती है। हम अक्सर दूसरों को सुधारना चाहते हैं परंतु रामायण हमें स्वयं में सुधार करने की शिक्षा देती है। साथ ही रामायण हमारे मन से अहंकार का विनाश कर मन में विनम्रता का भाव पैदा करती है। जीवन हमें वासना के लिए नहीं उपासना के लिए मिला है। साथ ही उन्होंने बताया की संसार और सागर में समानता है जिस तरह सागर में लहरें और तूफान उठते रहते हैं ठीक उसी तरह संसार में भी हमेशा तूफान उठते रहते हैं। जिस तरह नौका सागर से पार ले जाती है ठीक इसी तरह राम कथा रूपी नौका भी हमारा संसार सागर से पार उतरने का माध्यम है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया की स्वाध्याय की कमी एवं संस्कृत भाषा के ज्ञान न होने के कारण हमारे सनातन धर्मशास्त्रों में जो ज्ञान है उसके अर्थ का अनर्थ हो रहा है इसलिए हमें हमारे धर्म ग्रंथो का नित्य स्वाध्याय करना चाहिए
परमानन्द राठौर गुराडिया वर्मा
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